Distinguished people

देसी उद्यम का ध्वज लक्ष्मण किर्लोस्कर

एक गुलाम देश में देशज संस्कार के साथ उद्यम की कुबेरी बुलंदी को छूना आसान बात नहीं है। दरअसल, भारतीय इतिहास और आलोचना में जिस समय को नवजागरण का दौर कहा गया, उसी दौर में साहित्य और संस्कृति के समांतर बहुत कुछ ऐसा हो रहा था, जिसमें भारतीय गौरव और पुरुषार्थ नए सिरे से अपनी …

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साम्यवादी संघर्ष का पुरोधा ईएमएस नंबूदरीपाद

समाज और विचार का संघर्ष जब ठोस प्रतिबद्धता से जुड़ जाए तो ऐतिहासिक व्यक्तित्व की रचना होती है। आधुनिक भारत में समाज, राजनीति और विचार की संघर्ष यात्रा से जुड़ा ऐसा ही एक नाम है ईलमकुलम मनक्कल शंकरन नंबूदरीपाद। नंबूदरीपाद एक समाजवादी-मार्क्सवादी विचारक, क्रांतिकारी, लेखक, इतिहासकार और सामाजिक टीकाकार थे। उनका जन्म आज के मल्लापुरम …

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आधुनिक कन्नड़ साहित्य के पुरोधा मास्ति वेंकटेश अय्यंगार

ज्ञान की अलग-अलग धारा और परंपरा के बीच साहित्य का स्थान मानवीय संवेदनाओं से जुड़ाव और उसकी अक्षुण्णता के हामीदार होने के कारण ऊंचा है। बड़ी बात यह भी कि भाषा और संस्कृति से जुड़ी तमाम निर्मितियों के बीच साहित्य यह काम लंबे समय से करता आ रहा है। आज जब भाषा भी वर्चस्व का …

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साहस के सात दशक अहिल्याबाई होल्कर

भारत के इतिहास के कुछ पन्ने ऐसे हैं जो समाज सुधार और खासकर महिला सशक्तीकरण के मामले में क्रांतिकारी सुलेख की तरह हैं। दुर्भाग्य से अस्मिता और सामाजिक न्याय के स्वाधीनोत्तर सरोकारों और व्याख्याओं के बीच अतीत की प्रेरणा को ज्यादा अहमियत नहीं दी गई। ऐसा ही एक प्रेरक नाम है- अहिल्याबाई होल्कर। महिला विरोधी …

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विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम

भक्ति और विद्रोह को एक ही स्वर में साधना बड़ी सफलता तो है ही, रचनात्मक तौर पर विलक्षण भी है। इस लिहाज से काजी नजरुल इस्लाम एक बड़ा और निर्विवादित नाम है। दिलचस्प यह कि उनका दौर बहुत पीछे का नहीं है। ऐसे लोग आज भी हमारे बीच हैं, जो नजरुल से मिले हैं, उनसे …

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‘अपनी गंध नहीं बेचूंगा’- बालकवि बैरागी

जीवन और कर्म के क्षेत्र में साधारण की असाधारण यात्रा हमेशा ही सबको प्रभावित करती है। एक निहायत सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले बालकवि बैरागी ने साहित्य और सिनेमा से लेकर राजनीति तक जिस तरह का सघन और सार्थक जीवन जिया, वह अपने आप में एक मिसाल है। नाम की ही भांति बालमन, सरल व्यक्तित्व …

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